mithila sahitysudha

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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

गीत @प्रभात राय भट्ट

गीत
ऐ सजनी कने घुंघटा उठाऊ ने हमर प्राण प्रिया
पूर्णिमा सन अहांक सूरत देखिला फाटेय हिया //२
थर थर कपैय देह मोर धरकैय करेज पिया
यौ पिया कोना घुंघटा उठाऊ धक् धक् धरकैय जिया //२
...
पहिल प्रेमक पहिल मिलन में एना करैछी किया
ऐ सजनी कने घुंघटा उठाऊ ने हमर प्राण प्रिया
अहि हमर लाजक घुंघटा उठा दिय ने पिया
नजैर कोना हम मिलाऊ धक् धक् धरकैय जिया //२

एकटा बात पुछू पिया कहू साँच साँच कहब तं
हमरा विनु कोना रहब अहाँ जौं हम नै रहब तं
धनि जे बजलौं फेर नै बाजब कहू हाँ कहब तं
अहाँ विनु जिब नै सकब हम जौं अहाँ नै रहब तं //२

संग छुटतै नै अप्पन टुटतै नै पिरितिया
खा कS कहैछी सजना हम इ किरिया
छोड़ी देब दुनिया हम तोड़ी देब जग के रीत
छोड़ब नै अहांक संग सजनी तोड़ब नै प्रीत //२

छोड़ी देब दुनिया हम तोड़ी देब जग के रीत
छोड़ब नै अहांक संग सजना तोड़ब नै प्रीत
अहिं सं जगमग करेय हमर जीवन ज्योति
अहिं छि सजनी हमर मोनक हिरामोती //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

गजल @प्रभात राय भट्ट

गजल
एसगर कान्ह पर जुआ उठौने,कतेक दिन हम बहु
दर्द सं भरल कथा जीवनके,ककरा सं कोना हम कहू

अपने सुख आन्हर जग,के सुनत हमर मोनक बात
कहला विनु रहलो नै जाइय,कोना चुपी साधी हम रहू

अप्पन बनल सेहो कसाई,जगमे भाई बाप नहीं माए
सभ कें चाही वस् हमर कमाई,दुःख ककरा हम कहू

देह सुईख कS भेल पलाश,भगेल हह्रैत मोन निरास
बुझल नै ककरो स्वार्थक पिआस,कतेक दुःख हम सहु

मोन होइए पञ्चतत्व देह त्यागी,हमहू भS जाए विदेह
विदेहक मंथन सेहो होएत,कोना चुपी साधी हम रहू

नैन कियो करेज,कियो अधिकार जमाएत किडनी पर
होएत किडनीक मोलजोल, सेहो दुःख ककरा हम कहू

बेच देत हमर अंग अंग, रहत सभ मस्ती में मतंग
बजत मृदंग जरत शव चितंग सेहो कोना हम कहू
.........................वर्ण:-२२.............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

गजल
कतय भेटत एहन प्रेम जे मीत अहाँ देलौं
मित्रताक कर्मपथ पर मोन जीत अहाँ लेलौं
स्वार्थक मीत जग समूचा,मोन मीत नहीं कियो
धन्य सौभाग्य हमर मोन मीत बनी अहाँ एलौं

स्वार्थक मेला में भोगलौं हम वर वर झमेला
हर झमेला में बनिक सहारा मीत अहाँ एलौं

मजधार डूबैत हमर जीवनक जीर्ण नाव
नावक पतवार बनी मलाह मीत अहाँ एलौं

निस्वार्थ भाव अहाँ मित्रताक नाता जोड़ी लेलहुं
हर नाता गोटा सं बड़का रिश्ता मीत अहाँ देलौं

नीरसल जिन्गीक हर क्षण भेल छल उदास
उदास जिन्गीक ठोर पर गीत मीत अहाँ देलौं

संगीतक ध्वनी सन निक लगैय मीतक प्रीत
कृष्ण सुदामाक प्रतिक बनी मीत अहाँ एलौं
...............वर्ण:-१८.....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012


गीत @प्रभात राय भट्ट

                 गीत  
यौ  पिया मारु नै जुल्मी नजरिया
की लच लच लचकय मोर कमरिया //२ मुखड़ा

हमर  मोन  नै बह्काबू यौ पिया
रखु अहां अपना दिल पर काबू
कोमल कोमल अंग की मोर बाली उमरिया
थर थर कापे देह की धक् धक् धरके जिया

ऐ धनी लचकाबू नै पतरकी कमरिया
की मोन भेल जैय हमर बाबरिया
देख अहाँक सोरह वसंतक चढ़ल जवानी
धनी बहकल जैय हमरो  जुवानी

यौ पिया हम सभटा बात बुझैतछि
हमरा संग अहां की की कS  र चाहैतछि
छोड़ी दिय ने आँचर पिया
की धक् धक् धर्कैय हमर जिया

एखन नै जाऊ सजनी छोड़ी कें
हमर मोनक उमंग झकझोरी कें
ये गोरी आब एतेक नै नखरा धरु
की झट सं प्रेमक मिलन करू

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 5 फ़रवरी 2012


गजल@प्रभात राय भट्ट


                                       गजल
चंचल मोनक भीतर परम चैतन्य उर्जा सुषुप्त भेल अछि 
मोह लोभ क्रोध रिस रागक तेज सं आत्मा सुषुप्त भेल अछि

दुष्ट  मनुख आतुर अछि करैए लेल मनुखक सोनित पान
दानवीय प्रबृति केर दम्भ सं मानव रूप विलुप्त भेल अछि

जन्मलैत छलहूँ बालेश्वर, कुमारी कन्या पूजैत छल संसार
आयु बढ़ैत सभ सुमति बिसारि कुमति संग गुप्त भेल अछि

स्वार्थलिप्सा केर आसक्त मनुख जानी सकल नहीं जीवन तत्व
परालौकिक परमानन्द बिसारि सूरा सुंदरी में लिप्त भेल अछि

दुर्जन बनल संत चरित्रहीन महंथ बदलैत ढोंगी रूप
अकर्मनिष्ठक कुकर्म सं गुण शील विवेक सुषुप्त भेल अछि
....................वर्ण-२४......................................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012


भेदभावों की चिंगारी @प्रभात राय भट्ट

भेदभावों की चिंगारी ने 
हमारे  पूर्वजों की आत्मा को जलाया था 
जलते हुए आत्माओं का अंगार बनके 
मै इस जहाँ में आया था
मेरे साथ भी वही हुवा 
जो न होना था !!
 
मैंने  उस दुःख दर्द को
बड़ी मुश्किल से झेला था
आप तो एक बार मरोगे
मै तो सौ बार मरा था !!
 
फिर मैंने मेरे सोये हुए
आत्मा को जगाया था
मेरी आत्मा मुझे
दुत्कार रही थी
मेरी आत्मा मुझे
ललकार रही थी
मेरी आत्मा मुझे से
चीत्कार रही थी !!
 
उठो जागो मांगो अपना अधिकार
मिटा दो भेदभावों की अहंकार
बनालो अपनी खुद का पहिचान
तेरा स्वाभिमान से बढ़कर
इस जहाँ में कुछ और तो नहीं!!
 
जरा याद करो
स्वाभिमानी युग पुरुष को
तेरा पहिचान बनाने की खातिर
रघुनाथ ठाकुर चढ़ें थे वलिदान
दुर्गानन्द झा ने भी दी थी कुर्वानी
गजू बाबु की क्या कहना
उन्होंने ही तो बचा राखी थी
हम सबों की पहिचान !!
 
रमेश मंडल की आहुति से
हुवा था युगांतकारी संग्राम
मधेश आन्दोलन को
मिली था एक नयी आयाम !!
 
हमारे बाजुवों में भी वह ताकत है
हम बदल देंगे
अपनी हाथो की लकीरों को
तोड़ देंगे गुलामी की जंजीरों को   !!
 
आओ मेरे जिगर वाले भाइयों
अपना मंजिल
अपना यासियाना बनातें है
हम सब मिलके 
स्वतंत्रता की गीत गातें है
एक मधेश एक प्रदेश  बनाते है  
मातृभूमि को स्वतंत्र करके
पुत्र धर्म निभाते है !!
जय मधेश !! जय मधेश !! जय मधेश !!
 
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012


गीत@ प्रभात राय भट्ट

गीत@ प्रभात राय भट्ट
 
सुन सुन रे  सुन पवन पुरबैया 
की लेने चल हमरो अप्पन गाम  
हमर जन्मभूमि वहि ठाम
जतय छै सुन्दर मिथिलाधाम //२
 
देश विदेश परदेश घुमलौं
मोन केर भेटल नहीं आराम
साग रोटी खैब रहब अप्पने गाम
जतय छै सुन्दर मिथिलाधाम //२
 
घर घर में छन्हि बहिन सीता
राजर्षि जनक सन पिता
सभ केर पाहून छथि राम
जतय छै सुन्दर मिथिलाधाम //२
 
काशी घुमलौं मथुरा घुमलौं
घुमलौं मका मदीना
सभ सँ पैघ विद्यापति केर गाम
जतय छै सुन्दर मिथिलाधाम //२
 
हिमगिरी कोख सँ बहैय कमला कोशी बल्हान
तिरभुक्ति तिरहुत छै जग में महान
दूधमति सँ दूध बहैय छै वैदेहीक गाम
जतय छै  सुन्दर  मिथिलाधाम //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट